राज्य पुष्प ब्रह्मकमल उत्तराखण्ड
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उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाना वाला राज्य पुष्प ब्रह्मकमल विलुप्ति का खतरा मंडरा रहा है। सावन के महीने में बड़ी संख्या में पैदा होने वाला यह पुष्प अब धीरे-धीरे कम दिखाई दे रहा है। राज्य पुष्प के साथ ही यह भोले बाबा के भक्तों में बड़ी श्रद्धा भक्ति से देखा जाता है। वहीं वर्ष 2013 में आई केदारनाथ आपदा का असर भी इस पुष्प पर इस घाटी में देखा जा रहा है।
समुद्र तल से दस हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर पाया जाना वाला राज्य पुष्प केदारपुरी के आस-पास काफी कम संख्या में मिल पाता है। प्रत्येक वर्ष यह पुष्प सावन के महीने में उगता है और अगस्त महीने तक पाया जाता है। आपदा से पूर्व केदारनाथ मंदिर से ऊपर बासुकीताल, समेत ऊचाई वाले स्थानों पर बड़ी संख्या में यह देखा जाता था। वहीं चमोली में फूलों की घाटी में भी यह काफी दिखाई देता है।
श्रवन में भोले के भक्त इस पुष्प को शिव भगवान पर चढ़ाते हैं। माना जाता है कि इसके चढ़ावे से भोले बाबा अपने भक्तों पर काफी प्रसन्न होते हैं और उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। हालांकि लगातार मौसम में आ रहे परिवर्तन का असर भी इस पुष्प पर पड़ रहा है। एक दशक पूर्व केदारपुरी में यह पुष्प आम भक्त चढ़ावे के लिए लाते थे, लेकिन अब धीरे-धीरे यह विलुप्ति की ओर बढ़ रहा है।
केदारनाथ में भी मौसम में आ रहे बदलाव का असर इस पर पड़ रहा है। वर्ष 2013 में आई केदारनाथ आपदा से भी इस पुष्प को इस घाटी में काफी नुकसान पहुंचा है। चारो ओर ऊबड़ खाबड़ व मलबा होने से यह नहीं उग रहा है। धार्मिक महत्व के साथ ही ब्रह्मकमल औषधीय पौधे के रुप में भी बहुत उपयोगी है। खासी, जुकाम, जोड़ों के दर्द समेत कई अन्य प्रकार बीमारियों के लिए यह बहुउपयोगी है। इस पुष्प की खास बात यह है कि यह पत्थरों एवं चट्टानों पर उगता है। ऐसे में इस पुष्प के संरक्षण के लिए सरकार की ओर से पहल की जरूरत है।

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