पहाड़ को जीवन देते जलस्रोत
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मानव जीवन में जल स्रोतों की अहमियत की बात की जाए तो पहाड़ में जलस्रोत जंगल के बीच खेतों की बीच, चट्टानों के बीच या फिर आबादी के बीच भी दिखाई देती हैं। पहाड़ के जलस्रोतों के संवर्धन की बात करें तो यहां हर जंगल में अनेक जलस्रोत प्राकृतिक रूप से दिखाई देते, आज वहां जलस्रोत को छोड़ नौले, चुपट्यौव, पोखर कुछ भी नहीं दिखाई देते। जहां कभी एक सूद के बराबर पानी रिसकर जाता दिखाई देता, तो लोग उसे चुपट्यौव (लगभग एक से डेढ़ लीटर पानी एकत्रित किया हुआ गड्ढा) बनाकर उस जगह को जल स्रोत के रूप में रेखांकित कर देते थे। यदि चुपट्यौव से ज्यादा पानी दिखाई देता तो जलमानस उसे पोखर बनाते। जहां पर बण(जानवरों के चरागाह) से वापसी करते वक्त जानवर इससे अपनी प्यास बुझाते थे। बरसात में यह पोखर बिल्कुल छोटी सी सुरम्य झील दिखाई देती थी। इसी प्रकार पोखर से भी अधिक जलराशि दिखाई पड़ने पर मानव उसे नौले का आकर्षक रूप प्रदान किया करता जहां सतह पर कच्छा गड्ढा खोद दिया जाता। वहीं धीरे-धीरे ुपर की ओर वर्गाकार अथवा आयताकार रूप देकर ऊंचाई वाले नौले का निर्माण किया जाता, जिससे चारों और केवल चपटे पाथरों की चिनाई किए जाने उसकी ऊपरी सतह पर सीढ़ियां बनाने के लिए प्रयुक्त की जाती। अंत में इसके चारों ओर की दीवारों को उठाकर चारों तरफ से पानी भरने के लिए मोवनुमा (दरवाजे की सी आकृति) आकृति छोड़ दी जाती थी।
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मानव जीवन में जल स्रोतों की अहमियत की बात की जाए तो पहाड़ में जलस्रोत जंगल के बीच खेतों की बीच, चट्टानों के बीच या फिर आबादी के बीच भी दिखाई देती हैं। पहाड़ के जलस्रोतों के संवर्धन की बात करें तो यहां हर जंगल में अनेक जलस्रोत प्राकृतिक रूप से दिखाई देते, आज वहां जलस्रोत को छोड़ नौले, चुपट्यौव, पोखर कुछ भी नहीं दिखाई देते। जहां कभी एक सूद के बराबर पानी रिसकर जाता दिखाई देता, तो लोग उसे चुपट्यौव (लगभग एक से डेढ़ लीटर पानी एकत्रित किया हुआ गड्ढा) बनाकर उस जगह को जल स्रोत के रूप में रेखांकित कर देते थे। यदि चुपट्यौव से ज्यादा पानी दिखाई देता तो जलमानस उसे पोखर बनाते। जहां पर बण(जानवरों के चरागाह) से वापसी करते वक्त जानवर इससे अपनी प्यास बुझाते थे। बरसात में यह पोखर बिल्कुल छोटी सी सुरम्य झील दिखाई देती थी। इसी प्रकार पोखर से भी अधिक जलराशि दिखाई पड़ने पर मानव उसे नौले का आकर्षक रूप प्रदान किया करता जहां सतह पर कच्छा गड्ढा खोद दिया जाता। वहीं धीरे-धीरे ुपर की ओर वर्गाकार अथवा आयताकार रूप देकर ऊंचाई वाले नौले का निर्माण किया जाता, जिससे चारों और केवल चपटे पाथरों की चिनाई किए जाने उसकी ऊपरी सतह पर सीढ़ियां बनाने के लिए प्रयुक्त की जाती। अंत में इसके चारों ओर की दीवारों को उठाकर चारों तरफ से पानी भरने के लिए मोवनुमा (दरवाजे की सी आकृति) आकृति छोड़ दी जाती थी।

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