उत्तराखण्ड
में आई 16 व् 17 जून को भयंकर त्रासदी की दूसरी बरसी पर सभी दिवंगत
आत्माओं को भाव भीनी श्रद्धांजलि एवम् उनके परिजनों को बाबा केदार जीने की
संयम,शक्ति,सामर्थ्य दे,
और दुबारा फिर कभी भी कहीं भी ऐसा न हो
बाबा केदार से प्रार्थना है_/\_
ॐ शांति शांति शांति.......
त्रासदी फरि लिख्यूँ मेरु एक अद्दा गीत..
गायक हरीश रावत चलचित्र
"गढ़वाल express"
हे बाबा केदार कनु यु चक्रचाल ह्वाई
उत्तराखण्ड की धर्ति कनि या पाणी मा समाई कनि पाणी जुग्ता ह्वाई.....
1-कुबगत बर्खि निर्भगि अगास सब्बि लीग्ये खँगाळी
कै ग्ये खरबट खंडमंड साख्युं भटि छौ जु जग्वाळी
कन तेरु यू न्यो निसाब कब तेरु संगसार
आत्मा चलिग्ये बैकुंठ माँ खंजर पौंछि हरिद्वार
चोदिसुं मच्चि हाहाकार
चौदिसुं ह्वे अंधकार.......
2-भगवती कालिँका माई केखु बौगा मारी
पैलि रख्वळी छै तू हमरी जै बोद्यां रै जै धारी
अपड़ा भी नि पछ्यणी न त्वेन
बाळा लग्याँ रैनी साँकी
भिट्येंदि गैनी मनखि रग्वड़ा मा तेरी
बुझी रैनी आँखी.....
3-रम्दा गोर बग्दा मनखी उजड़ी ख़ाल धार
कखि त रौंदरा बि नी बच्चि मौ कि मौ संघार
मुख जात्रा खू तरस्दा रैनी बस खोज्दि रैनि आँखी
स्यूँद्यूं कू सिन्दूर हर्ची
रीती ह्वे यख साँखी........
4-देवि द्यब्तों कु दोष लगि होळु क्य लगि होळु क्वी असगार
डामु न डमेग्या यख धर्ति
अळझै गैनी तार
चितै जावा मनख्यूँ अब्बि बि गंगा जी धै च लाणी
बिजली भूमि बणौला कखि यख रै न जौ स्याणी गाणी
कखि ह्वे न जौ पाणी पाणी.....
और दुबारा फिर कभी भी कहीं भी ऐसा न हो
बाबा केदार से प्रार्थना है_/\_
ॐ शांति शांति शांति.......
त्रासदी फरि लिख्यूँ मेरु एक अद्दा गीत..
गायक हरीश रावत चलचित्र
"गढ़वाल express"
हे बाबा केदार कनु यु चक्रचाल ह्वाई
उत्तराखण्ड की धर्ति कनि या पाणी मा समाई कनि पाणी जुग्ता ह्वाई.....
1-कुबगत बर्खि निर्भगि अगास सब्बि लीग्ये खँगाळी
कै ग्ये खरबट खंडमंड साख्युं भटि छौ जु जग्वाळी
कन तेरु यू न्यो निसाब कब तेरु संगसार
आत्मा चलिग्ये बैकुंठ माँ खंजर पौंछि हरिद्वार
चोदिसुं मच्चि हाहाकार
चौदिसुं ह्वे अंधकार.......
2-भगवती कालिँका माई केखु बौगा मारी
पैलि रख्वळी छै तू हमरी जै बोद्यां रै जै धारी
अपड़ा भी नि पछ्यणी न त्वेन
बाळा लग्याँ रैनी साँकी
भिट्येंदि गैनी मनखि रग्वड़ा मा तेरी
बुझी रैनी आँखी.....
3-रम्दा गोर बग्दा मनखी उजड़ी ख़ाल धार
कखि त रौंदरा बि नी बच्चि मौ कि मौ संघार
मुख जात्रा खू तरस्दा रैनी बस खोज्दि रैनि आँखी
स्यूँद्यूं कू सिन्दूर हर्ची
रीती ह्वे यख साँखी........
4-देवि द्यब्तों कु दोष लगि होळु क्य लगि होळु क्वी असगार
डामु न डमेग्या यख धर्ति
अळझै गैनी तार
चितै जावा मनख्यूँ अब्बि बि गंगा जी धै च लाणी
बिजली भूमि बणौला कखि यख रै न जौ स्याणी गाणी
कखि ह्वे न जौ पाणी पाणी.....

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